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वैश्विक अर्थव्यवस्था का हाल के वर्षों में रुख

21वीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक अर्थव्यवस्था ने असाधारण बदलाव देखे हैं। कोविड-19 महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव, जलवायु संकट और तकनीकी क्रांति जैसे अनेक कारकों ने आर्थिक परिदृश्य को जड़ से बदल दिया है। इस ब्लॉग में हम वैश्विक आर्थिक रुख के मुख्य पहलुओं की चर्चा करेंगे जो हाल के वर्षों में वैश्विक सहयोग, व्यापार और नीति-निर्माण को प्रभावित कर रहे हैं।

1. मल्टीलेट्रलिज्म में गिरावट

बहुपक्षीय सहयोग (Multilateralism) में अब गिरावट देखी जा रही है। वैश्विक मंच जैसे WTO, संयुक्त राष्ट्र और G20 की भूमिका में अपेक्षित प्रभाव नहीं दिख रहा है।

  • अमेरिका, चीन और रूस अब द्विपक्षीय समझौतों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
  • WTO के विवाद समाधान तंत्र को अमेरिका ने अवरुद्ध किया है।
  • G20 में रूस-यूक्रेन मुद्दे पर आम सहमति नहीं बन पाई।
  • 📌 WTO Ministerial Conference 2024 ने व्यापार विवाद समाधान को लेकर कोई ठोस निष्कर्ष नहीं दिया।

2. बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था का उभरना

अब सत्ता केवल अमेरिका या पश्चिम तक सीमित नहीं है। एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देश वैश्विक नीति में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।

  • BRICS 2023 सम्मेलन में UAE और सऊदी अरब जैसे देशों को शामिल किया गया।
  • चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) 150+ देशों में फैला है।
  • भारत की G20 2023 अध्यक्षता में ग्लोबल साउथ को प्राथमिकता दी गई।

3. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का पुनर्गठन

मुक्त व्यापार समझौते अब अधिक रणनीतिक और क्षेत्रीय होते जा रहे हैं।

  • RCEP: 15 एशिया-प्रशांत देशों के बीच दुनिया का सबसे बड़ा FTA।
  • USMCA: अमेरिका, मेक्सिको और कनाडा के बीच नया समझौता जो NAFTA का उन्नत संस्करण है।

4. टैरिफ और व्यापार बाधाओं में वृद्धि

राष्ट्र अब टैरिफ को रणनीतिक हथियार की तरह उपयोग कर रहे हैं।

  • चीन और अमेरिका ने अरबों डॉलर के उत्पादों पर टैरिफ लगाए।
  • भारत ने कई चीनी ऐप्स और उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया।

5. घरेलू उद्योगों के लिए सुरक्षात्मक कदम

देश अब आत्मनिर्भर बनने और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं।

  • भारत का PLI (Production Linked Incentive) स्कीम।
  • ‘मेक इन अमेरिका’, ‘चाइना 2025’ जैसे अभियानों का विस्तार।
  • यूरोप में पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों को सब्सिडी दी जा रही है।

6. वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्गठन

कोविड और भू-राजनीतिक तनावों के चलते कंपनियाँ अब उत्पादन भारत, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देशों की ओर स्थानांतरित कर रही हैं।

  • 'चाइना प्लस वन' रणनीति का अपनाना।
  • 'फ्रेंडशोरिंग' और 'नीयरशोरिंग' जैसे नए मॉडल्स।
  • भारत में Apple और Samsung जैसी कंपनियों का विस्तार।

7. जियोइकोनॉमिक ब्लॉक्स का उदय

BRICS+, ASEAN-GCC, और QUAD जैसे आर्थिक समूह वैश्विक ध्रुवों का निर्माण कर रहे हैं।

  • BRICS में नए देशों की सदस्यता जैसे सऊदी अरब, UAE।
  • चीन द्वारा बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत निवेश।

8. हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर झुकाव

जलवायु संकट और तकनीकी विकास आर्थिक नीतियों को नई दिशा दे रहे हैं।

  • EU Green Deal की शुरुआत।
  • भारत की DPI नीति जैसे UPI, CoWIN, ONDC।
  • AI Paris Summit 2023 में वैश्विक डिजिटल गवर्नेंस पर सहमति।

निष्कर्ष

वैश्विक अर्थव्यवस्था एक संक्रमण काल से गुजर रही है। राष्ट्रवाद और संरक्षणवाद के साथ-साथ हरित और डिजिटल भविष्य की ओर भी प्रवृत्ति बढ़ रही है। बहुध्रुवीय शक्ति-संतुलन (Multipolarity) वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को पुनर्परिभाषित कर रहा है। इन विविध और विरोधाभासी प्रवृत्तियों के बीच संतुलन बनाना आगामी वर्षों की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Featured Q&A (Google Snippet Friendly)

  • Q: वर्तमान वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन क्या है?
    A: बहुध्रुवीय शक्ति संतुलन और आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे बड़े परिवर्तन हैं।
  • Q: वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए हाल के कौन-से सम्मेलन प्रमुख हैं?
    A: BRICS 2023, G20 भारत शिखर सम्मेलन, WTO Ministerial 2024, और Paris AI Summit 2023।
  • Q: भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में कैसे उभर रहा है?
    A: भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, G20 नेतृत्व और मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में वैश्विक स्तर पर प्रभाव बढ़ा रहा है।