आर्थिक वितरण प्रणालियां
आर्थिक वितरण प्रणालियाँ संसाधनों को आवंटित करने और समाज में आय का वितरण करने की विधियाँ हैं। वितरण प्रणालियों के आधार पर अर्थव्यवस्थाओं को बाजार, गैर बाजार, मिश्रित अर्थव्यवस्था कहा जाता है।
वितरण प्रणालियों का विचार सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास की अवधारणा से संबंधित है जिन्हें आगे विस्तार से पढ़ेंगे। इस टॉपिक से upsc परीक्षाओं में अक्सर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रश्न पूछे जाते हैं।
अतिमहत्वपूर्ण ↓↓↓
विभिन्न प्रकार की अर्थव्यवस्थाएं एवं वितरण प्रणालियां :
बाजार अर्थव्यवस्था/ बाजार वितरण प्रणाली:
- उद्भव स्कॉटलैंड के दार्शनिक अर्थशास्त्री एडम स्मिथ (1723-90) की पुस्तक (एन इन्क्वायरी इंटू द नेचर एंड कॉजज ऑफ द वेल्थ ऑफ नेशंस, 1776) से माना जाता है।
- बाजार अर्थव्यवस्था = अकेला छोड़ देना/ अहस्तक्षेप।
- निज स्वार्थ के लिए विभिन्न आर्थिक गतिविधियां।
- स्वार्थी प्रेरणादायक कारक (अदृश्य हाथ) मांग एवं आपूर्ति के अनुसार स्वतः निवेश करते हैं।
- नियमन बाजार में विद्यमान प्रतिस्पर्धा करती है।
- वितरण : बाजार की शक्ति द्वारा।
गैर बाजार अर्थव्यवस्था/ गैर बाजार वितरण प्रणाली :
- कार्ल मार्क्स (1818-83) के विचारों पर आधारित।
- दो स्वरूप - समाजवादी (प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य का स्वामित्व) एवं साम्यवादी ( प्राकृतिक संसाधनों के साथ श्रम पर भी राज्य का स्वामित्व)।
- गैर बाजार = सिर्फ राज्य ही आर्थिक भूमिका निभाएगा, सिर्फ राज्य ही निर्णय करेगा।
- बाजार, बुर्जुआ वर्ग व प्रतिस्पर्धा की अनुपस्थिति।
- इन्हे आने वाले समय में राज अर्थव्यवस्था, कमांड अर्थव्यवस्था, केंद्रीकृत नियोजित अर्थव्यवस्था आदि नामों से भी जाना गया।
- वितरण : सरकार द्वारा।
मिश्रित अर्थव्यवस्था/ मिश्रित वितरण प्रणाली :
- मिश्रित अर्थव्यवस्था (बाजार समाजवाद), वास्तव में बाजार एवं गैर बाजार आर्थिक प्रणालियों के लक्षणों एवं तत्वों के मिश्रण से बनी है, जिसमे निजी क्षेत्र एवं राज्य दोनों ही आर्थिक भूमिका निभाते हैं। इस घटना को 'विचारधारा का अंत' भी कहा गया।
- मिश्रित अर्थव्यवस्था को अपनाने की औपचारिक घोषणा फ्रांस द्वारा की गई (1944-45)।
- सीमित हस्तक्षेप।
- वितरण: कुछ वस्तुओं की आपूर्ति बाजार द्वारा एवं कुछ की सरकार द्वारा (मुफ्त या छूट पर)।
अन्य ↓↓↓
आर्थिक प्रणालियां, सामाजिक न्याय एवं समावेशी विकास में अंतर्संबंध:
आर्थिक प्रणालियाँ किसी देश में संसाधनों के उत्पादन, वितरण और उपभोग के तरीके को तय करती हैं। वहीं, सामाजिक न्याय का मतलब है समाज के सभी वर्गों को बराबरी का अवसर, सम्मान और अधिकार मिलना।
अगर आर्थिक प्रणाली ऐसी हो जो संपत्ति और संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करती है (जैसे – सब्सिडी, जन वितरण प्रणाली, न्यूनतम वेतन), तो यह सामाजिक न्याय को बढ़ावा देती है।
इस न्यायपूर्ण वितरण से ही समावेशी विकास संभव होता है — यानी ऐसा विकास जिसमें समाज का हर वर्ग आर्थिक प्रगति में भागीदार बनता है।
न्यायसंगत आर्थिक प्रणाली → सामाजिक न्याय सुनिश्चित → समावेशी विकास को संभव बनाती है। तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।
एक संतुलित, समावेशी और न्यायोचित आर्थिक प्रणाली सामाजिक न्याय की नींव है, क्योंकि यही तय करती है कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को आवश्यक संसाधनों और अवसरों तक समान पहुँच मिले या नहीं।
मिश्रित अर्थव्यवस्था भारत
भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप एवं वितरण प्रणाली क्रमबद्ध रूप से विकसित हुए हैं भारत में आर्थिक वितरण प्रणालियों की ऐतिहासिक प्रगति को पढ़ोगे तो पाओगे कि भारत ने आजादी के तुरंत बाद अर्थव्यवस्था के अधिकतर क्षेत्रों पर सरकारी नियंत्रण रखा, फिर 80 के दशक में मिश्रित अधिक थी और 90 के दशक में उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण सुधारों के चलते इसका रुख बाजार अर्थव्यवस्था की ओर अधिक झुका है लेकिन अब भी यह एक मिश्रित अर्थव्यवस्था है।
भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System – PDS)
- PDS एक सरकारी प्रायोजित प्रणाली है जो सस्ती दरों पर खाद्यान्न और आवश्यक वस्तुओं का वितरण करती है। यह प्रणाली मुख्य रूप से राशन दुकानों के माध्यम से संचालित होती है।
- इसके अंतर्गत सरकार किसानों से MSP पर अनाज खरीदती है, FCI (Food Corporation of India) गोदामों में भंडारण करता है, राज्यों को आवंटन दिया जाता है, राशन दुकानों के माध्यम से उपभोक्ताओं तक आपूर्ति होती है।
- NFSA 2013 लागू होने पर PDS को कानूनी दर्जा मिला।
- भारत में लगभग 80 करोड़ लोग PDS के लाभार्थी हैं।
- अन्य: डिजिटल राशन कार्ड (Aadhar लिंकिंग),, इ-पॉस मशीनों का उपयोग।
भारत में वितरण प्रणाली में सरकारी हस्तक्षेप के अन्य उदाहरण:
- खाद्य सुरक्षा: PDS, NFSA, ONORC, Mid-Day Meal
- कृषि सहायता: MSP, PM-KISAN, Fertilizer Subsidy
- स्वास्थ्य: Ayushman Bharat, RSBY, POSHAN
- रोजगार व आय: MGNREGA, NSAP
- वित्तीय समावेशन: Jan Dhan, DBT
आर्थिक प्रणाली व वितरण प्रणाली में अंतर:
| पक्ष | आर्थिक प्रणाली (Economic System) | वितरण प्रणाली (Distribution System) |
|---|---|---|
| परिभाषा | किसी देश की उत्पादन, उपभोग और संसाधनों के आवंटन की समग्र व्यवस्था | उत्पादित संसाधनों, वस्तुओं और आय को समाज में बाँटने की व्यवस्था |
| फोकस | संपूर्ण अर्थव्यवस्था को चलाने का ढांचा | वस्तुओं और सेवाओं के वितरण का तरीका |
| मुख्य प्रकार | पूंजीवादी, समाजवादी, मिश्रित | बाजार आधारित, राज्य आधारित, मिश्रित वितरण |
| केंद्रबिंदु | उत्पादन के तरीके, संसाधनों का स्वामित्व, निर्णय लेने की प्रक्रिया | "कौन, क्या, कितना और कैसे प्राप्त करेगा" पर ध्यान |
| उदाहरण | भारत की मिश्रित अर्थव्यवस्था | भारत की PDS, DBT, MSP आधारित वितरण प्रणाली |
| संबंध | वितरण प्रणाली, आर्थिक प्रणाली का एक भाग होती है | यह आर्थिक प्रणाली के तहत संचालित होती है |
पिछली परीक्षाओं में पूछे गए प्रश्न :
प्रीलिम्स में पूछे गए प्रश्न:
प्रश्न 2018:यदि सरकार द्वारा कोई वस्तु जनता को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती है, तो
- (a) विकल्प लागत शून्य होती है।
- (b) विकल्प लागत की उपेक्षा की जाती है।
- (c) विकल्प लागत को उत्पादन के उपभोक्ता से कर देने वाली जनता को अन्तरित कर दिया जाता है। ✓
- (d) विकल्प लागत को उत्पाद के उपभोक्ता से शासन को अन्तरित कर दिया जाता है।
प्रश्न 2018राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अधीन बनाए गए उपबन्धों के सन्दर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
- केवल वे ही परिवार सहायता प्राप्त खाद्यान्न लेने की पात्रता रखते हैं, जो 'गरीबी रेखा' से नीचे (Below Poverty Line, BPL) श्रेणी में आते हैं।
- परिवार में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र की सबसे अधिक उम्र वाली महिला ही राशन कार्ड निर्गत किए जाने के प्रयोजन से परिवार की मुखिया होगी।
- गर्भवती महिलाएँ एवं दुग्ध पिलाने वाली माताएँ गर्भावस्था के दौरान और उसके छः महीने बाद तक प्रतिदिन 1600 कैलोरी वाला राशन घर ले जाने की हकदार हैं।
- उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/है?
- (a) 1 और 2
- (b) केवल 2✓
- (c) 1 और 3
- (d) केवल 3
प्रश्न 2018: निम्नलिखित में से कौन-सा/से भारत में वर्ष 1991 में आर्थिक नीतियों के उदारीकरण के बाद घटित हुआ/हुए है/हैं?
- जीडीपी में कृषि का अंश बृहत् रूप से बढ़ गया।
- विश्व व्यापार में भारत के निर्यात का अंश बढ़ गया।
- एफडीआई का अन्तर्वाह (इनफ्लो) बढ़ गया।
- भारत का विदेशी विनिमय भण्डार बृहत् रूप से बढ़ गया।
- नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) 1 और 4
- (b) 2, 3 और 4
- (c) 2 और 3
- (d) ये सभी
UPSC मैंस में पूछे गए प्रश्न :
2019: "सरकार द्वारा खाद्यान्न वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उठाए गए सुधारात्मक कदम क्या हैं?"
2021: "राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं? खाद्य सुरक्षा विधेयक ने भारत में भूख और कुपोषण को समाप्त करने में कैसे मदद की है?"
2022: "भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की प्रमुख चुनौतियाँ क्या हैं? इसे प्रभावी और पारदर्शी कैसे बनाया जा सकता है?"
जानकारी के स्रोत
- भारतीय अर्थव्यवस्था : रमेश सिंह (16वां संस्करण)
- विपणन, अर्थशास्त्र एवं बैंकिंग : लुसेंट