UPSC मैंस उत्तर लेखन(answer writing) कैसे करें?
आपको तैयारी शुरू किए कितना समय हो चुका है? पहली परीक्षा किस वर्ष दोगे? क्या प्रीलिम्स की तैयारी हो चुकी है या आपने पहला अटेम्प्ट भी दे दिया है? ये सवाल इसलिए पूछ रहे हैं क्योंकि हर स्टेज पर आपके सोचने का नजरिया अलग होगा, अप्रोच अलग होगी (समय के साथ इनपुट बढ़ने से सोच ज्यादा सटीक होती जाती है)।
1. UPSC तैयारी के शुरुआती समय आंसर राइटिंग कैसे सीखें:
जब नए अभ्यर्थी (Aspirant) उत्तर लेखन(Answer Writing) शुरू करते हैं तो कई सवालों में उलझते हैं कि आंसर का ढांचा (structure) कैसा हो, समझने लायक सरल भाषा का प्रयोग कैसे करें (पांडित्यपन से बचना), डेटा (तथ्य, आंकड़े, हाइलाइट्स इत्यादि) किस तरह के हो और अपने विचार सही ढंग से कैसे लिखें, सीमित ज्ञान के साथ प्रश्न की डिमांड कैसे पहचाननी है, और एक ही प्रश्न की कई डिमांड्स को फुलफिल करने में संतुलन कैसे बनाना है। क्या कोई तरीका है जिससे जान सके कि जांचकर्ता जवाब में क्या देखना चाहता है।
ये सारे वो सवाल है जिनके जवाब आप खुद नहीं दे सकते और न ही कोई अकेला गाइडर दे सकता हैै। आपको कई टॉपर्स टॉक, टॉपर्स की कॉपीज इत्यादि से गुजरना होगा, कई जगहों से इनपुट लेकर क्रॉस चेक करना होगा। इन गाइडेंस के इनपुट्स को लेते रहना है और उनके अनुसार आंसर राइटिंग करते रहना है और बार बार प्रयास करते रहना है। इस प्रक्रिया में एक दिन आप उचित्तम आंसर्स लिखना सीख जाएंगे।
2. UPSC सिलेबस कवर करने के बाद भी आंसर राइटिंग नहीं हो पा रही है?
हमने अभी उन अभ्यर्थियों की बात की थी जो नए नए तैयारी में उतरे हैं, लेकिन जब आप एक बार चीजें पढ़ चुके होते या पूरा सिलेबस कवर कर चुके होते हैं तो आपके आंसर राइटिंग से जुड़े सवाल बदलने लगते हैं। अब आपको थोड़ा बहुत अनुमान होता है कि आंसर कैसे डिजाइन करना है और उसमें क्या लिखना है लेकिन फिर भी आंसर लिख नहीं पाते हैं, क्यों? क्योंकि आपके पास पर्याप जानकारियां ही नहीं होती भले ही आपने टॉपिक कवर कर रखा हो (उचित एप्रोच से कवर नहीं) या जानकारियां तो है पर आप उन जानकारियों को आंसर्स में ढाल नहीं पा रहे होते हैं।
अब आपके सवाल होंगे कि जब आप किसी टॉपिक को कवर करो तो किस तरह करो कि उस टॉपिक से जुड़ा हर प्रश्न का जवाब दिया जा सके या जो भी सीमित कंटेंट पढ़ा है उससे किसी भी तरह के प्रश्न का उत्तर कैसे दिया जा सकता है।
- पहले सवाल का जवाब सीधा है : आपको हर टॉपिक को सीमित पर प्रयाप्त की अप्रोच से कवर करना है न कि सब कुछ। सब कुछ के चक्कर में सब कुछ छूट जाएगा। सीमित पर पर्याप्त की अप्रोच कहां से लाए? ये अप्रोच कहीं मार्केट में नहीं मिलती इसलिए शुरुआत में आपको केवल सीमित की अप्रोच से कवर करना चाहिए और जब आंसर राइटिंग करने लगोगे ओर समझोगे की आपके कंटेंट में क्या कमी है तो तभी एडऑन करते जाना पर्याप्त की अप्रोच भी आ जाएगी।
- दूसरा सवाल की सीमित ज्ञान से उस टॉपिक का हर प्रश्न कैसे अटेम्प्ट करे? मैं कहूंगा कि यही सबसे महत्वपूर्ण सवाल है और एक्चुअल एग्जाम में ये ही नैया पार लगाएगा 🙂.... असल में जब आप आंसर लिख रहे होते हैं "एक सीरियस कंडीडेट की तरह", बाबू सोना की तरह नहीं,, तो आप जानकारी से आंसर नहीं लिखते बल्कि समझ से आंसर लिखते हैं। अब समझ चाहे सीमित भी है लेकिन बेसिक्स अच्छे है तो आप आसपास की भीड़ इतने लंबे चौड़े सिलेबस में से कहीं से भी इकट्ठा कर लेंगे।
- जैसे अगर चक्रवात जैसी किसी आपदा और उससे आर्थिक नुकसान पर प्रश्न है तो आपको बस चक्रवात का च आना चाहिए: चक्रवात की किताबी परिभाषा नहीं देनी है बल्कि खुद से शॉर्ट में परिभाषित करना है और फिर अन्य पहलुओं पर चले जाना है → आपके पास 8 मिनट का ही समय है ऐसे में अब चक्रवात के आर्थिक नुकसान पर चले जाना है → क्या आपको चक्रवात के नुकसान किताब से पढ़ने की जरूरत है? इतने बुद्धू हो आप? माना आप किताब जितना अच्छा नहीं सोच पाओगे पर भईया उन्हें याद भी तो नहीं रख पाओगे 👀 → खुद से सोचकर लिखो जो भी दिमाग में आए।
खुद की सोच बेहतरीन कैसे बनाएं? → हां ये हुई न IAS वाली बात → जवाब है बार बार प्रैक्टिस से, शुरू से ही चीजें जानकारियों की तरह पढ़ने के बजाय समझ की तरह पढ़ो। समझ से ही उत्तर लिखो। उत्तर की शुरुआत दिमाग से लिखी परिभाषा से → फिर विभिन्न विषयों के नजरिए से चीजें लिखो मतलब इंटरलिंकिंग, जानकारियों को कुछ बने बनाए डायग्राम इत्यादि तरीकों से लिखो।
- जैसे अगर चक्रवात जैसी किसी आपदा और उससे आर्थिक नुकसान पर प्रश्न है तो आपको बस चक्रवात का च आना चाहिए: चक्रवात की किताबी परिभाषा नहीं देनी है बल्कि खुद से शॉर्ट में परिभाषित करना है और फिर अन्य पहलुओं पर चले जाना है → आपके पास 8 मिनट का ही समय है ऐसे में अब चक्रवात के आर्थिक नुकसान पर चले जाना है → क्या आपको चक्रवात के नुकसान किताब से पढ़ने की जरूरत है? इतने बुद्धू हो आप? माना आप किताब जितना अच्छा नहीं सोच पाओगे पर भईया उन्हें याद भी तो नहीं रख पाओगे 👀 → खुद से सोचकर लिखो जो भी दिमाग में आए।
- अगर आप चीजों को समझ की बजाय जानकारियों की तरह पढ़ोगे तो आपके सवाल होंगे: क्या आपके नोट्स प्रश्नों के उत्तर देने के लिए पर्याप्त है, पर्याप्त नोट्स कैसे बनाएं, क्या उस टॉपिक पर करेंट कवर किया है, चीजों को आंसर फ्रेंडली फॉर्मेट में कैसे कवर करें, इतने सारे विषय कैसे मैनेज करें आदि आदि 😞। पर भाई गोली मार इतनी लंबी चौड़ी बहियों को और समझ विकसित कर।
- समझ केवल आंसर राइटिंग में हेल्प करेगी, अब भी प्री के लिए बहुत सारी चीजें रट्टा मारनी पड़ेगी 👶।
3. UPSC मैंस में अपने अंक कैसे बढ़ाएं, आंसर राइटिंग कैसे सुधारें:
जब आप एक बार मेंस दे चुके होते हैं तो आपका ध्यान अंक बढ़ाने पर होता है "की मैं क्या करूं जिससे अधिकतम अंक अर्जित कर सकूं"।
अब आप एक मैच्योर और समझदार अभ्यर्थी है, आप बिल्कुल भी सामान्य गाइडेंस की तलाश में नहीं है बल्कि अब आपको ऐसा व्यक्ति चाहिए जो आपकी कमियों को पहचानकर ऐसे सुझाव दे सके जिनको फोलो करने से वास्तव में आपके अंक बढ़े।
क्या मैं अब आपको कोचिंग का सुझाव देने वाला हूं? क्या मॉक टेस्ट प्रमोट करूंगा? नहीं, बिल्कुल नहीं । मेरा अनुभव कहता है कि अब आपको अपने नजदीकी SDM ऑफिस जाना चाहिए और अगर वहां कोई यंग IAS की नियुक्ति हुई है तो आप उन्हें गाइडेंस के लिए अप्रोच कीजिए। अगर वो मना कर दे तो किसी और ऑफिस जाइए पर आपको सपोर्ट मिलेगा। विश्वास मानिए आपको सही राह जरूर मिलेगी और उससे अधिक सही राह आपको और कोई नहीं दे सकता।