वैश्विक आर्थिक सहमतियां: वॉशिंगटन, बीजिंग और सैंटियागो मॉडल की तुलना
- 1970-80 के दशक में कई देशों में महंगाई, कर्ज़, बेरोज़गारी बढ़ी।
- अमेरिका और पश्चिमी देशों ने नीति-निर्माण में बाजार आधारित सुधारों को बढ़ावा दिया।
- इसी दौर में IMF, विश्व बैंक, WTO जैसी संस्थाएं सक्रिय हुईं।
- इसी परिप्रेक्ष्य में Washington Consensus (1989), Beijing Consensus, Santiago Consensus आदि आए।
प्रमुख सहमतियां
वॉशिंगटन सहमति (Washington Consensus):
- वॉशिंगटन सहमति एक आर्थिक नीति फ्रेमवर्क है जिसे 1989 में अर्थशास्त्री John Williamson ने प्रस्तावित किया था। यह मुख्यतः लैटिन अमेरिका जैसे विकासशील देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं (IMF, World Bank, US Treasury) द्वारा सुझाई गई सुधारों की सूची थी, जिसे बाद में वैश्विक आर्थिक सुधारों के मानक के रूप में देखा जाने लगा।
- इसमें वित्तीय अनुशासन, कर सुधार, उदारीकरण एवं निजीकरण जैसे 10 सुधार सुझाए गए थे।
- राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline)
- सार्वजनिक व्यय की प्राथमिकताओं में सुधार (Reordering Public Expenditure Priorities)
- कर सुधार (Tax Reform)
- ब्याज दरों का उदारीकरण (Liberalization of Interest Rates)
- प्रतिस्पर्धात्मक विनिमय दर (A Competitive Exchange Rate)
- व्यापार उदारीकरण (Trade Liberalization)
- प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा (Liberalization of Inward Foreign Direct Investment)
- निजीकरण (Privatization)
- नियमन हटाना (Deregulation)
- संपत्ति अधिकारों की सुरक्षा (Secure Property Rights)
- Washington Consensus को कई देशों ने अपनाया, लेकिन इसके परिणाम मिश्रित रहे — कुछ देशों में आर्थिक स्थिरता आई, जबकि कुछ में असमानता और सामाजिक समस्याएं बढ़ गईं।
- आरोप लगा कि ये सुधार विकसित देशों ने विकासशील देशों पर नव उपनिवेशवाद बढ़ाने के लिए थोपे थे।
बीजिंग सहमति :
- वर्ष 2004 में जोशुआ कूपर रेमो द्वारा बीजिंग सहमति का प्रस्ताव रखा गया जिसे चीनी आर्थिक विकास मॉडल भी कहा जाता है।
- इस सहमति के अंतर्गत उन आर्थिक नीतियों को शामिल किया जाता है जिसका अनुसरण डेंग जिओपिंग द्वारा वर्ष 1976 से किया गया।
- तीन स्तंभों पर आधारित
- अनवरत प्रयोग एवं अन्वेषण;
- शांतिपूर्ण वितरणकारी आर्थिक वृद्धि के साथ साथ क्रमिक विकास;
- स्वभाग्यनिर्णय के साथ ही चुनिंदा विदेशी विचारों को अपनाना।
सैंटियागो सहमति : ( सैंटियागो चिली की राजधानी)
- सैंटियागो सहमति कोई एकल दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि यह विचारों की एक श्रृंखला है जो मुख्यतः चिली जैसे लैटिन अमेरिकी देशों के अनुभवों और समावेशी विकास की आवश्यकता पर आधारित है। इसका मूल उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक समावेश को सुनिश्चित करना है।
- यह एक स्थानीय विशेषताओं पर आधारित सामाजिक-आर्थिक विकास मॉडल है, जिसमें सामाजिक व्यंजानाएं भी शामिल हैं — जैसा कि बीजिंग सहमति में भी देखा गया था।
- इस मॉडल को क्रियान्वित करने के लिए विश्व बैंक द्वारा आर्थिक सहायता प्रदान की गई और साथ ही सूचना तकनीक की शक्ति का उपयोग करने पर विशेष बल दिया गया।
- प्रमुख आउटकम :
- समावेशी विकास पर बल (Focus on Inclusive Growth)
- राज्य की भूमिका को पुनः मान्यता (Reassertion of State Role)
- समाज में असमानता को कम करना (Reducing Inequality)
- सार्वजनिक निवेश को बढ़ावा (Promotion of Public Investment)
- सतत विकास की प्राथमिकता (Sustainable Development Priority)
- भागीदारी आधारित शासन (Participatory Governance)
- आर्थिक स्थायित्व के साथ सामाजिक कल्याण (Economic Stability + Social Welfare)
- वैश्विक सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (Global & South-South Cooperation)
नोट्स के अलावा जानकारियां:
आर्थिक सहमतियाँ, विचारधाराओं से कैसे भिन्न है?
- आर्थिक विचारधाराएं सैद्धांतिक सोच होती हैं जो यह तय करती हैं कि अर्थव्यवस्था कैसे चलेगी—जैसे पूंजीवाद, समाजवाद, या नवउदारवाद। ये दीर्घकालिक दिशा देती हैं और किसी देश की नीति, बाजार और राज्य की भूमिका को परिभाषित करती हैं।
- आर्थिक सहमतियां IMF, विश्व बैंक आदि द्वारा दिए गए व्यावहारिक नीति-सुझाव होते हैं, जैसे वॉशिंगटन या बीजिंग सहमति। इनका उद्देश्य संकट से उबरने, निवेश बढ़ाने या वैश्वीकरण को लागू करने में देशों की मदद करना होता है।
वॉशिंगटन, बीजिंग और सैंटियागो मॉडल की तुलना
| पहलू | वॉशिंगटन मॉडल | बीजिंग मॉडल | सैंटियागो मॉडल |
|---|---|---|---|
| शासन का स्वरूप | उदार लोकतंत्र | सत्तावादी/केन्द्रित | लोकतांत्रिक समाजवाद |
| अर्थव्यवस्था | मुक्त बाजार | राज्य-नियंत्रित बाजार | मिश्रित अर्थव्यवस्था |
| सामाजिक पहलू | न्यूनतम भूमिका | सीमित ध्यान | मुख्य भूमिका |
| फोकस | आर्थिक दक्षता | दीर्घकालिक स्थिरता | सामाजिक समावेशन |
| निजीकरण | पूर्ण समर्थन | नियंत्रित रूप में | चयनात्मक |
| शिक्षा/स्वास्थ्य | बाज़ार पर निर्भरता | सरकार की भूमिका अधिक | सरकार की प्राथमिकता |
वैश्विक आर्थिक सुधारों में हाल के वर्षों में नए सुधार
वर्तमान में विश्व बहुपक्षवाद (WTO, UN, G20 जैसे संगठन) की पकड़ कमजोर हो रही है और विश्व बहुध्रुवीयता की और तथा द्विपक्षीय समझौतों जैसे FTA, क्षेत्रीय करेंसी में व्यापार आदि को अपना रहा है
पढ़ें : वैश्विक अर्थव्यवस्था 2025: मल्टीपोलर वर्ल्ड, संरक्षणवाद और सहयोग की नई राहें