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भारतीय वित्त बाजार

किसी अर्थव्यवस्था में होने वाले धन के लेन देन के बाजार को उसका वित्तीय बाजार कहते हैं।

1. मुद्रा बाजार/ अल्पकालिक बाजार:

यह 364 दिन की अवधि में लेन देन वाला बाजार है।

पूंजी बाजार से दीर्घकालिक धन लेकर केवल उद्योग स्थापित किया जाता है, प्रतिदिन चालू व्यय (कार्यकारी पूंजी) के लिए उद्योगों को अल्पावधिक धन की जरूरत होती है, जिसकी पूर्ति वाले तौर तरीकों को मुद्रा बाजार कहा जाता है।

दूसरे शब्दों में अल्प मुद्रा व अतिरिक्त मुद्रा वाले पक्षों के बीच अल्पावधि के लिए लेन-देन की प्रक्रिया को मुद्रा बाजार के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।

मुद्रा बाजार को कार्यशील पूंजी बाजार और अल्पावधिक वित्त बाजार भी कहते हैं।

1.1 असंगठित मुद्रा बाजार :

सरकारी विनियमन से बाहर प्राचीन काल से चला आ रहा मुद्रा बाजार।(शोषक)

1.2 संगठित मुद्रा बाजार:

मुद्रा बाजार की लेनदेन जो सरकार द्वारा नियमित उपकरणों के माध्यम से होती है। उपकरण :

मुद्रा बाजार उपकरण विस्तार से पढ़ें ↗

2. पूंजी बाजार/ दीर्घकालिक बाजार:

किसी अर्थव्यवस्था में दीर्घावधिक (कम से कम 365 दिन और अधिक की) लेन देन वाला वित्तीय बाजार को पूंजी बाजार कहा जाता है।

विश्वभर में पूंजी बाजार में पूंजी (पूंजी = निवेश योग्य धन) लेन देन सुनिश्चित करने वाले संस्थानों में सर्वप्रथम बैंक उभरे, फिर बीमा उद्योग, म्यूचुअल फंड और अंत में प्रतिभूति/स्टॉक बाजार इसमें शामिल हुए।

पूंजी बाजार के संगठित विकास के साथ इसके लिए विनियामक बनाना सदैव मुस्किल रहा।

मुद्रा बाजार की भांति ही पूंजी बाजार में भी लेनदेन कई साधनों/ उपकरणों के माध्यम से होती है जिन्हें पढ़ना जरूरी है

पूंजी बाजार के उपकरण विस्तार से पढ़ें ↗