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मुद्रा आपूर्ति (Money Supply)

'मुद्रा आपूर्ति' से आशय मुद्रा की कुल मात्रा से है, जो अर्थव्यवस्था में लोगों द्वारा विभिन्न रूपों में अपने पास रखी जाती है। इसे मुद्रा स्टॉक (Money stock) भी कहा जाता है।

आम बातचीत में धन की आपूर्ति का अर्थ होता है - धन का प्रसार (मनी सर्कुलेशन) यानी अर्थव्यवस्था में धन का बहाव।

लेकिन बैंकिंग और ठेठ मौद्रिक प्रबंधन शब्दावली में M3 लेवल और M3 आपूर्ति को धन की आपूर्ति कहा जाता है।

इस टॉपिक को सिंपल तरीके से समझो:

1. आरक्षित मुद्रा (Reserve Money) या M0 :

1.1 RBI की शब्दावली में आरक्षित धन :

नीचे दिए गए 6 सेग्मेंट के सकल पूंजी को सरकार या अर्थव्यस्था के लिए आरक्षित धन (रिजर्व मनी-आरएम) के तौर पर जाना जाता है:

  1. आरबीआई की ओर से सरकार को दिया गया कुल कर्ज;
  2. आरबीआई की ओर से बैंकों को दिया गया कुल उधार;
  3. आरबीआई की ओर से वाणिज्यिक बैंकों को दिया गया कुल उधार;
  4. आरबीआई के पास मौजूद कुल विदेशी मुद्रा;
  5. सरकार की जनता के लिए मुद्रा की जवाबदेही;
  6. आरबीआई की कुल गैर-मौद्रिक जवाबदेही;

Reserve Money = 1+2+3+4+5+6.

मुद्रा तरलता (Liquidity of Money)

तरलता का अर्थ है कि आप कितनी जल्दी अपनी नकदी प्राप्त कर सकते हैं।

जब हम M1 से M4 की और जाएंगे तो धन की तरलता (जड़ता, स्थिरता, खर्च करने की क्षमता) घटेगी और विपरीत दिशा में तरलता बढ़ेगी।

2. तरलता के आधार पर मुद्रा आपूर्ति का वर्गीकरण :

मुद्रा की पूर्ति पर विचार करने के लिए RBI ने सर्वप्रथम 1961 में एक कार्यकारी समिति का गठन किया। इसके पश्चात दूसरा कार्यकारी समूह 1977 में गठित किया जिसने तरलता के माप के आधार पर मुद्रा को चार वर्गों में बांटा गया:

मुद्रा आपूर्ति से संबंधित चार्ट
मुद्रा आपूर्ति से संबंधित चार्ट

इन्हें समझें :

2.1 संकीर्ण मुद्रा (Narrow Money)

2.2 विस्तृत मुद्रा (Broad Money) :

2.3 उच्च शक्ति वाला धन (High Power Money) :

2.3.1 न्यूनतम आरक्षित निधि प्रणाली :

न्यूनतम भंडार (Minimum Reserve) :

आरबीआई के लिए ₹200 करोड़ के बराबर का सोना और विदेशी मुद्रा अपने पास रखना जरूरी है। इनमें से र 115 करोड़ का सोना होना चाहिए। इस संचय के एवज में आरबीआई को कितनी भी मुद्रा छापने की छूट मिली हुई है। इसका पालन 1957 से हो रहा है और इसे न्यूनतम संचय प्रणाली (एमआरएस) के तौर पर जाना जाता है। (वर्तमान में केवल 115 करोड़ का सोना रखना होता है)

2.3.2 भारत में उच्च शक्ति मुद्रा आपूर्ति के दो स्रोत है:

अर्थव्यवस्था में मुद्रा का प्रवाह कहाँ-कहाँ व्याप्त है, इस बात की जानकारी रिजर्व बैंक द्वारा रखी जाती है, ताकि मौद्रिक नीतियों का संचालन किया जा सके एवं अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह के स्तर का मूल्यांकन किया जा सके। 1977 में पूंजी की आपूर्ति पर गठित दूसरे कार्य समूह की अनुशंसाओं के आधार पर आरक्षित मुद्रा (M0) के अलावा M1 M2, M3, और M4 के आंकड़ों को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रकाशित किया जाता रहा है।


मुद्रा के 21 प्रकार↗

भारत में चलन में नोट व सिक्के ↗

मुद्रा गुणक (Money multiplier) ↗