विदेशी निवेशकों के पास भारत में निवेश के विकल्प एवं निवेश सीमाएं
भारत में सर्वप्रथम 1974 में फेरा(FERA) कानून के लागू होने से सीमित विदेशी निवेश को स्वीकृति मिली थी।
वर्तमान में विदेशी निवेश के दो मार्ग है : एक स्वतः अनुमत अर्थात जिसके लिए किसी से कोई पूर्व अनुमति आवश्यक नहीं एवं दूसरा है स्वीकृति मार्ग जहां कुछ क्षेत्रों में निवेश के लिए अधिकृत संस्था (RBI या वित्त मंत्रालय) से निवेश पूर्व अनुमति आवश्यक होती है।
भारत में विदेशी निवेश के लिए विकल्प
- स्टॉक मार्केट, म्यूचुअल फंड, IPO आदि में मुक्त रूप से अनुमत।
- कुछ बॉन्ड, रियल स्टेट, सोना, बचत योजनाओं पर कुछ प्रतिबंध अभी भी है।
बॉन्ड:
- Masala Bonds व कुछ सरकारी बॉन्ड्स में 100% FPI निवेश की अनुमति है।
- RBI द्वारा समय-समय पर तय सीमा पर राज्य सरकार बॉन्ड्स में निवेश की अनुमति।
- कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में RBI और SEBI द्वारा तय की गई investment limits, credit rating, और tenure के आधार पर निवेश की अनुमति होती है।
- किन बॉन्ड्स में विदेशी निवेशक निवेश नहीं कर सकते?
- कुछ Small Saving Schemes (जैसे PPF, NSC आदि) में विदेशी निवेशकों को अनुमति नहीं है।
- Unrated और Low-rated Corporate Bonds में अधिकतर निवेश की अनुमति नहीं होती।
- कुछ Non-convertible Debentures (NCDs) जिनमें जोखिम ज्यादा हो, वहाँ निवेश पर प्रतिबंध हो सकता है।
रियल स्टेट
- विदेशी निवेशकों को SEBI द्वारा रजिस्टर्ड REITs (एक तरह के म्यूचुअल फंड जो रियल स्टेट में निवेश करते हैं) में निवेश की अनुमति है।
- कंस्ट्रक्शन वर्क में भी 100% FDI अनुमत।
- सीधा रियल स्टेट में निवेश नहीं कर सकते, यानी जमीन, प्लॉट आदि सीधा नहीं खरीद सकते।
सोना
- भारत में कोई विदेशी नागरिक या संस्था सीधे भौतिक सोना नहीं खरीद सकती जब तक कि वे भारत में Resident न हों या उनके पास स्पेशल RBI परमिशन न हो। (प्रतिबंध FEMA के तहत)
- गोल्ड बॉन्ड, म्यूचुअल फंड आदि में निवेश कर सकते हैं।
भारत सरकार की बचत/निवेश योजनाएं
- राष्ट्रीय पेंशन व्यवस्था (NPS: National Pension System) चुनिंदा में से हैं जहां केवल NRI निवेश कर सकते हैं।
- FD में भी केवल NRI या उनके समकक्ष ही निवेश कर सकते हैं, विदेशी नागरिक नहीं।
- अन्य किसी भी बचत योजना में विदेशी निवेशक निवेश नहीं कर सकते।
भारत में निवेश पर पूर्णतः निषेध:
निम्नलिखित कार्यकलाप करनेवाला या करने का इरादा रखनेवाले किसी कंपनी अथवा साझेदारी फर्म अथवा स्वामित्व प्रतिष्ठान अथवा किसी कंपनी चाहे वह निगमित हो या नहीं, में किसी भी प्रकार के विदेशी निवेश पर निषेध है:
- (i) चिट फंड के कारोबार
- (ii) निधि कंपनी
- (iii) कृषि अथवा बागान कार्यकलाप
- (iv) स्थावर संपदा कारोबार अथवा फार्म हाउस का निर्माण (स्थावर संपदा में टाऊनशिप का विकास, रिहायशी/वाणिज्यिक परिसर, सड़क अथवा पुल, शैक्षणिक संस्थाएं, मनोरंजन सुविधाएं, शहर तथा स्थानीय स्तर की बुनियादी सुविधाएं, टाउनशिप का विनिर्माण शामिल नहीं है।)
- (v) अंतरणीय विकास अधिकारों (टीडीआर) के व्यापार में
उपर्युक्त के अलावा, कतिपय क्षेत्रों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के रूप में निवेश निषिद्ध है, जैसे:
- (क) खुदरा व्यापार
- (ख) परमाणु ऊर्जा
- (ग) लॉटरी कारोबार
- (घ) जुआ और सट्टेबाजी
- (ङ) चिट फंड का कारोबार
- (च) निधि कंपनी
- (छ) अंतरणीय विकास स्वत्वाधिकार का कारोबार
- (ज) वे गतिविधियां जो निजी क्षेत्र में निवेश के लिए अनुमत नहीं हैं
- (झ) कृषि (पुष्पखेती, बागवानी, बीजों का विकास, पशुपालन, मछली पालन और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित नियंत्रित परिस्थितियों में सब्जी, मशरूम आदि की खेती को छोड़कर) और बागान (चाय बागान को छोड़कर)
निवेश के लिए सीमाओं के साथ अनुमति वाले क्षेत्र
- लघु उद्योग इकाइयों में निवेश: अनुमति ✓
- परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों में निवेश (ARCs)
- स्वतः अनुमोदित मार्ग उपलब्ध नहीं है। RBI पूर्व अनुमति आवश्यक।
- प्रतिभूति बाजार में बुनियादी (इन्फ्रास्ट्रक्चर) कंपनियों में निवेश: 49% पूर्व अनुमति से।
- स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन में, विदेशी निवेश SEBI विनियमावली के अनुपालन में और निम्न शर्तों पर अनुमत है:
- 26% की विदेशी प्रत्यक्ष निवेश सीमा और 23% विदेशी संस्थागत निवेश सीमा सहित कुल 49% तक निवेश अनुमत है।
- विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) की पूर्व अनुमति आवश्यक।
- विदेशी संस्थागत निवेशक केवल सेकंडरी मार्केट में खरीद द्वारा ही निवेश कर सकते हैं।
- स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉर्पोरेशन में, विदेशी निवेश SEBI विनियमावली के अनुपालन में और निम्न शर्तों पर अनुमत है:
- क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों में निवेश: 49%
- संवर्धन बोर्ड की अनुमति से।
- विदेशी प्रत्यक्ष निवेश 49% तक और विदेशी संस्थागत निवेश 24% तक ही अनुमत है।
- FII केवल सेकंडरी मार्केट से ही निवेश कर सकते हैं।
- कोई भी FII प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से 10% से अधिक इक्विटी नहीं रख सकता।
- पण्य बाजारों में निवेश
- FDI की 26% और FII की 23% सीमा सहित कुल 49% तक निवेश अनुमत।
- FII केवल सेकंडरी मार्केट के माध्यम से ही निवेश कर सकते हैं।
- सरकारी क्षेत्र के बैंकों में निवेश
- 20% की समग्र सीमा तक ही FDI तथा FII निवेश अनुमत है।
कहां कितना FDI अनुमत है:
- अंतरिक्ष (Space) क्षेत्र:
- उपग्रह निर्माण और संचालन: 74% तक FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत; 74% से अधिक निवेश के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक।
- लॉन्च वाहन और संबंधित प्रणालियाँ: 49% तक FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत; इससे अधिक के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक।
- उपग्रह घटकों और प्रणालियों का निर्माण: 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत।
- बीमा (Insurance) क्षेत्र:
- FDI सीमा को 74% से बढ़ाकर 100% करने का प्रस्ताव (बजट 2025); शर्त: संपूर्ण प्रीमियम भारत में निवेश हो।
- रक्षा (Defence) क्षेत्र:
- 49% तक FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत; इससे अधिक के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक।
- प्रसारण (Broadcasting) क्षेत्र:
- FM रेडियो और समाचार/समसामयिक विषयों वाले टीवी चैनल: 49% तक FDI स्वीकृति मार्ग से अनुमत।
- गैर-समाचार टीवी चैनल: 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत।
- बैंकिंग (Banking) क्षेत्र:
- निजी बैंकों में कुल 74% तक विदेशी निवेश (FDI + FPI) अनुमत; शर्त: नियंत्रण और प्रबंधन भारतीयों के पास रहे।
- विमानन (Civil Aviation) क्षेत्र:
- ग्रीनफील्ड हवाईअड्डे: 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत।
- ब्राउनफील्ड हवाईअड्डे: 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत।
- निधारित वायु परिवहन सेवा: 49% तक स्वचालित मार्ग और उससे अधिक के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक।
- फार्मास्यूटिकल (Pharmaceutical) क्षेत्र:
- ग्रीनफील्ड परियोजनाएँ: 100% FDI स्वचालित मार्ग से अनुमत।
- ब्राउनफील्ड परियोजनाएँ: 74% तक स्वचालित मार्ग और उससे अधिक के लिए सरकारी अनुमोदन आवश्यक।