AspirantsWay

किसी समस्या को कैसे हल करें, upsc एस्पिरेंट के लिए समस्या समाधान तकनीक


UPSC एस्पिरेंट को हर दिन एक नई समस्या से सामना करना पड़ता है, तैयारी का हर पड़ाव एक समस्या है। UPSC की तैयारी की सच्चाई तो यहां तक है कि आपको जो चीजें पढ़नी होती है उसके लिए केवल 6 महीने ही काफी है लेकिन क्या पढ़ना है जानने में कई साल लग जाते हैं। आप सफल होंगे या नहीं, ये भी आपकी समस्या समाधान तकनीक और स्पीड पर निर्भर करता है। आप किसी टॉपिक को कितना गहराई से और कहां तक पढ़ना है जानने के चक्कर में इतना समय खराब कर देते हैं जितने में की आप उस टॉपिक को दो बार कवर कर लेते।

UPSC एस्पिरेंट को तैयारी शुरू करने से लेकर अंत तक आने वाली विभिन्न समस्याएं :

समस्या कैसे हल करें :

UPSC एस्पिरेंट मुख्यतः तीन तरह की समस्याओं का सामना करते हैं:

  1. स्टडी मटेरियल से जुड़ी समस्या :
    • यह कोई बहुत बड़ी समस्या नहीं है, आप टॉपर्स टॉक देखकर अपनी एक बुकलिस्ट बना सकते हैं या मुखर्जी नगर जैसे शहरों में जाकर नई नई तरह की उपलब्ध बुक्स को अपने अकॉर्डिंग देखकर ला सकते हैं।
  2. रणनीति से जुड़ी समस्या, कि कैसे कवर करे :
    • एस्पिरेंट्स के लिए पूरी तैयारी में सबसे बड़ी समस्या यही रहती है की किसी विषय को कैसे संपूर्ण कवर करें, कितना गहराई से कवर करें, कहां से पढ़े...आदि
    • रणनीति से जुड़ी समस्या कैसे हल करें (Click to drop down)

      अच्छी रणनीति के लिए आपके लिए सबसे जरूरी है :

      1. सिलेबस को समझना
      2. पिछले वर्षों के प्रश्नों को समझना
      3. टॉपर्स गाइडेंस
      4. अच्छा स्टडी मटेरियल
      5. एक अच्छी रणनीति

      किसी पेपर के लिए एक अच्छी रणनीति कैसे बनाएं

      1. पहले, बेसिक मटेरियल पढ़े, जिससे आपको उस विषय की समझ विकसित हो। क्योंकि बिना विषय की समझ विकसित किए सिलेबस को नहीं समझा जा सकता और न ही पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को समझा जा सकता है (मतलब फर्स्ट रीडिंग से है)।
      2. फर्स्ट रीडिंग के बाद समस्या सिलेबस के अकॉर्डिंग चीजें कवर करने की आती है और इसके लिए आपको सिलेबस को समझना अतिआवश्यक है। लेकिन सिलेबस को समझने के लिए आपको पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (PYQ) का विश्लेषण करना होगा।
      3. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों के विश्लेषण के तरीके को हमने विस्तार से बताया हुआ, जहां आपको PYQ से कुछ की-टॉपिक्स/ पॉइंट्स निकालने हैं।
      4. इन की पॉइंट्स की सहायता से आप सिलेबस के कीवर्ड्स का विस्तृत अर्थ निकाल सकते हैं।
        • या आप इन कीवर्ड्स की सहायता से अपना स्वयं का सिलेबस भी बना सकते हैं। जैसे अगर PYQ में भूकंप और चक्रवात का पूछा गया है तो अगली बार भूस्खलन का पूछ सकते हैं क्योंकि ये भी एक प्राकृतिक आपदा है। आप ऐसे ही हर विषय में कीवर्ड्स निकालकर, उन कीवर्ड्स को एक अलग ग्रुप में रखकर pyq बेस्ड सिलेबस बना सकते हैं।
        • स्वयं का सिलेबस बनाने के बारे में हमने "किसी विषय की संपूर्ण तैयारी कैसे करें" ब्लॉग में अच्छे से विस्तार से बताया है आप देख सकते हैं।
      5. जब आप सिलेबस को अच्छे से समझ ले या स्वयं का सिलेबस बना ले तो आपके सामने अगली समस्या होती है की इन टॉपिक्स को कितनी गहराई से कवर करें और किन टॉपिक्स को पहले कवर करें:
        • किन टॉपिक्स का कितना महत्त्व है ये तो आप PYQ विश्लेषण से जान ही लेंगे इसलिए किन टॉपिक्स को पहले कवर करना है ये आपका निजी मामला है।
        • रही बात गहराई की, तो उसके लिए आप उपलब्ध समय को सभी प्रश्नपत्रों में उनके महत्व के अकॉर्डिंग बांटे, जिस विषय को जितना समय मिले उसे उतना ही दें। उस विषय को मिले समय को विभिन्न टॉपिक्स में बांटे और फिर उन टॉपिक्स को भी उतना ही समय दें जितना उपलब्ध हो। अब आप समझ ही गए होंगे कि किसी टॉपिक को उतनी ही गहराई से पढ़ना है जितना उपलब्ध समय में पढ़ा जा सके।
        • प्रयास करें कि आप किसी टॉपिक को कम से कम समय में कवर करें। क्योंकि गहराई की कोई सीमा नहीं होती, आप बस एक बार पूरा सिलेबस कवर कर लें। टॉपर्स को भी हमेशा ही यह लगता रहता है की उनके नोट्स अभी पूर्ण नहीं है उनसे भी बहुत कुछ छूट रहा हैं। जब आप पूरा सिलेबस कवर कर लेंगे, विस्तृत नोट्स बनाएंगे, आंसर राइटिंग करने के साथ साथ शॉर्ट नोट्स बनाएंगे तो इतनी लंबी प्रक्रिया में स्वयं ही यह अहसास हो जाएगा की आपको किस टॉपिक को कितनी गहराई से कवर करना है।
  3. दिनचर्या से जुड़ी समस्या :
    • मान लीजिए, आपके पिछले कुछ दिन खराब चल रहे हैं, आप पढ़ना चाह रहे हैं पर पढ़ नहीं पा रहे हैं, मोबाइल की आदत पड़ चुकी है, आलस आने लगा है और सबसे बड़ी बात की फालतू के थॉट्स आ रहे हैं जिन पर आपका कोई कंट्रोल नहीं है। वास्तव में यह एक समस्या है जिसका हल निकालना चाहिए।
    • रोजमर्रा की समस्याएं कैसे हल करें (Click to drop down)

      UPSC एस्पिरेंट को हर रोज एक नई समस्या का सामना करना पड़ता है और इससे पढ़ाई डिस्टर्ब होती है। समस्याएं हल करने के कई तरीके ही सकते हैं जिनका जिक्र हमने आगे किया है। अभी एक सामान्य तरीके पर चर्चा करते हैं:

      UPSC एस्पिरेंट रोजमर्रा की समस्याएं कैसे हल करें:

      1. एक कागज लें और इस पर अपनी समस्या लिखें, जो भी आपके दिमाग में आ रही हो। जैसे कि:
        • पढ़ाई नहीं हो रही है।
        • थॉट्स बहुत आते हैं
        • मोबाइल चलाने की आदत पड़ चुकी है।
        • घर के काम से डिस्टर्ब हो जाता हूं।
        • चीजें बहुत बोरिंग हो चुकी है
        • टॉपिक्स लंबे खींच रहे हैं।
        • बहुत अकेला फील होता है।
      2. समस्याएं एक बार कागज पर लिखने के बाद एक एक कर उन्हे सॉल्व करें। जैसे कि :
        • चीजें बोरिंग हो गई है क्योंकि आप एक ही विषय को लंबे समय से पढ़ रहे हैं। टारगेट पूरे नहीं हो रहे। चीजें कवर करने का कोई एक्यूरेट टाइम टेबल नहीं है। अब आपको इन कमियों को दूर करना चाहिए।
        • अकेला फील करते हो क्योंकि आपके पास कोई दोस्त नहीं है। कहीं ऑनलाइन बनाओ दोस्त।
        • म्मोबाइल की लत पड़ चुकी है क्योंकि मोबाइल ही आपका एकमात्र मनोरंजन का साधन है। मनोरंजन के अन्य साधन इजाद करो जैसे कि गेम्स, चित्रकारी, डांस आदि। (मोबाइल आपके मनोरंजन का साधन नहीं होना चाहिए)
        • टॉपिक्स लंबे खींच रहे हैं क्योंकि आपको पता नहीं है कि उस टॉपिक को कितनी गहराई से कवर करना है और क्या क्या कवर करना है। ऐसे टॉपिक्स में आपको चाहिए कि आप पहले ही उस टॉपिक से रिलेटेड सिलेबस कीवर्ड, पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों के कीवर्ड और उस टॉपिक से रिलेटेड कंटेंट से सब हेडिंग्स नोट कर लेवें।
      3. केवल समस्याएं हल करना पर्याप्त नहीं है क्योंकि ये समस्याएं बार बार आती है। आपको चाहिए कि आप कुछ खास समस्याओं के लिए एक मॉडल फ्रेमवर्क बना लें कि उस किसी खास समस्या के आने पर आप क्या एक्शन लेंगे।
        • जैसे कि जब भी मुझे लगता है कि पढ़ाई नहीं हो रही तो मैं सबसे पहले मौन होकर योग मुद्रा में बैठता हूं, अपनी समस्याएं समझने की कोशिश करता हूं, फिर कागज पर लिखकर हल करता हूं।
        • जब भी अकेला फील करता हूं, डायरी में थॉट्स लिखता हूं तो अकेलापन चला जाता है।
        • जब भी टारगेट्स पूरे नहीं हो रहे होते हैं तो मुझे पहले से पता होता है कि ये इसलिए हो रहा है क्योंकि मेरे टारगेट्स टाइम में बॉन्ड करने लायक नहीं है प्रगति मापने लायक नहीं है। दिनचर्या में वेराइटी ऑफ टारगेट्स नहीं है।

प्रोब्लम सॉल्विंग टेक्निक्स :

1. आत्म निरीक्षण

आप भावनात्मक बुद्धिमता के स्तर पर अपनी समस्याएं स्वयं से हल कर सकते हैं। इसके पांच चरण होते हैं :

2. IDEAL Model

यह मॉडल एक व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है:

3. SWOT Analysis

इस तकनीक से आप समस्या के विभिन्न पहलुओं का विश्लेषण कर सकते हैं:

4. 5 Whys Technique

यह तकनीक समस्या की जड़ तक पहुँचने के लिए इस्तेमाल की जाती है। समस्या के कारण का पता लगाने के लिए "क्यों" प्रश्न को 5 बार पूछें।

यह तकनीक आपको समस्या के मूल कारण तक पहुँचने और उसे हल करने में मदद करती है।

5. Mind Mapping

यह तकनीक विचारों को व्यवस्थित करने के लिए इस्तेमाल होती है।

6. PDCA Cycle (Plan-Do-Check-Act)

यह एक चार-चरणीय दृष्टिकोण है जो समस्या को सुलझाने और सुधारने के लिए प्रभावी है।

7. Brainstorming

यह तकनीक समूह में विचारों को एकत्रित करने के लिए प्रयोग की जाती है। इसमें सभी प्रतिभागी बिना किसी आलोचना के जितने भी विचार आ सकते हैं, उन्हें साझा करते हैं।

8. Pareto Analysis (80/20 Rule)

इस तकनीक के अनुसार, 80% समस्याओं का कारण केवल 20% कारण होते हैं। इसका उपयोग यह निर्धारित करने के लिए किया जाता है कि किन प्रमुख कारकों पर ध्यान केंद्रित करने से समस्या को प्रभावी ढंग से हल किया जा सकता है।

9. SCAMPER Technique

यह तकनीक समस्या के लिए रचनात्मक समाधान खोजने के लिए उपयोग की जाती है। SCAMPER का अर्थ है:

10. Fishbone Diagram (Ishikawa Diagram)

इस तकनीक का उपयोग किसी समस्या के कारणों का विश्लेषण करने के लिए किया जाता है। इसमें एक मछली की हड्डी के आकार का आरेख तैयार किया जाता है, जिसमें समस्या के संभावित कारणों को विभिन्न श्रेणियों में बाँटकर दिखाया जाता है।